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सबसे जरूरी चीज!
महाराजी - बार्सिलोना, स्पेन 15 जून, 2008

15 जून, 2008

महाराजी के यूरोप के टूर अभियान के प्रथम चरण में वहां के कई देशों जैसे इंग्लैंड के लेस्टर और टर्के शहर में, स्पेन के काल्पे व बिलबाव शहर में, जर्मनी के बर्लिन शहर में व आयरलैंड के बेलफास्ट शहर में प्रोग्राम संपन्न हुए । सभी देशों में प्रचार की दृष्टि से और लोगों के व्यक्तिगत स्तर पर भी इन कार्यक्रमों का बड़ा सुंदर प्रभाव रहा । लोगों के प्यासे हृदय तृप्त हो गये । एक तृप्त हृदय ही दूसरे प्यासे हृदय के लिए सहायक बन सकता है ।

यूरोप के टूर अभियान के दूसरे चरण में एक प्रोग्राम स्पेन देश के बार्सिलोना शहर में 15 जून 2008 को संपन्न हुआ । यह प्रोग्राम ज्ञान प्राप्त व्यक्तियों और वे लोग जो काफी समय से ज्ञान कुंजी देखते आ रहे थे, उनके लिए हुआ ।

प्रेमियों व जिज्ञासुओं से खचाखच भरे हाल को संबोधित करते हुए महाराजी ने कहा "जीवन में सबसे जरूरी क्या है ? क्योंकि लोग दुनिया के जितने भी लक्ष्य हैं उन्हें पहली प्राथमिकता देते हैं और जो उनके जीवन का मूल लक्ष्य है उसको दूसरे नंबर पर रख देते हैं । परंतु जबतक उस मूल लक्ष्य को पहली प्राथमिकता नहीं देंगे इस संसार में युध्द खत्म नहीं होंगे । और वह मूल चीज है मनुष्य के जीवन में शांति का होना । जब लोगों के जीवन में शांति की प्राप्ति करना पहली प्राथमिकता होगी और फिर भी लोग कहेंगे कि मुझे नहीं मालूम कि इसे किस प्रकार होना है, इसके बावजूद भी इसे होना अवश्य चाहिए, तब वह आशा की पहली किरण होगी ।

महाराजी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि "मैं राजनेता नहीं हूं । मैं सरकार नहीं हूं । मैं एक ही समय में और एक ही पृथ्वी पर रहने वाला आपके ही जैसा एक इंसान हूं । मेरा लक्ष्य है शांति का अनुभव करना । मैं जब और लोगों को शांति पाने के लिए मदद करता हूं तो मुझे बहुत खुशी मिलती है ।

ये सिर्फ मेरी कल्पना ही नहीं है । मैं लोगों को पानी की फोटो नहीं बेचता हूं । मैं प्यासे को पानी का वर्णन नहीं बेचता हूं । मैं प्यासे को पानी की फिल्म नहीं बेचता हूं बल्कि मुझे मालूम है कि पानी कहां है । मैं प्यासे को पानी देता हूं यह मैं कर सकता हूं और यह मैं करता हूं ।"

महाराजी ने आगे कहा कि अब यूरोप के लोगों में खूब जागृति और उत्साह देखने को मिल रहा है ।

इस प्रकार बड़ा ही सुंदर प्रेरणादायक व आनंद से भरपूर बार्सिलोना का यह प्रोग्राम संपन्न हुआ ।

 

परम सुखदायी !
महाराजी - अल्बनी, न्यूयार्क, 7 से 8 जून, 2008

8 जून, 2008

प्रचार वर्ष 2008 के प्रचार अभियान की श्रृंखला में महाराजी अमेरिका में अपना पहला प्रोग्राम अल्बनी, न्यूयार्क शहर में 7 व 8 जून 2008 को किया । अमेरिका के प्रेमी बड़े धैर्य व संयम से इस बात की इंतजार में थे कि 2008 में कब महाराजी के कार्यक्रम अमेरिका में होंगे । आखिर अमेरिका में प्रोग्रामों की शुरूआत हुई ।

दोनों दिन के ये प्रोग्राम ज्ञान प्राप्त व्यक्तियों के लिए सम्पन्न हुए । प्रचार वर्ष 2008 की विशेषता यह है कि महाराजी अधिकांशत: उन छोटे-छोटे स्थानों पर प्रोग्राम कर रहे हैं जहां पहले कभी उनके प्रोग्राम नहीं हुए । इन स्थानों में प्रोग्रामों के बाद तो वहां पर प्रचार का नजारा ही बदल जाता है ।

महाराजी यह चाहते हैं कि जिन्हें ज्ञान प्राप्त है वे लोग सचेत होकर इस जीवन का आनंद लें । इस विषय पर उन्होंने प्रेमियों को समझाते हुए कहा -
"जब आप अपनी मूल जरूरत को अनसुना कर देते हैं तो जरूर कुछ न कुछ होगा और वह सुखदायी नहीं होगा । तो सुखदायी क्या है ? जब हृदय कृतज्ञता से भरा हो वह सुखदायी है । जब इस जीवन की प्राथमिकता को समझ लिया जाए और स्वीकार कर लिया जाए, वह अत्यंत सुखदायी है । जब मैं 'जो कल बीत गया है और जो कल आने वाला है उसकी तरफ ध्यान न देकर जो अब है उस पर एकाग्र हो जाता हूं तो वह बहुत-बहुत सुखदायी है । जब मैं उस शक्ति को जो हमारे अंदर है, समझ लेता हूं तो वह बहुत-बहुत सुखदायी है । जब मैं यह स्वांस जो मेरे अंदर आ रहा है और जा रहा है उसे स्वीकार कर लेता हूं तो वह वह बहुत-बहुत सुखदायी है । जब मैं अपने अंदर के मित्र को जानता हूं तो यह बहुत-बहुत सुखदायी है । ज्ञान का यही मतलब है । जीवन का यही मतलब है । सतगुरु का यही मतलब है ।"

दूसरे दिन का प्रोग्राम दो भागों में सम्पन्न हुआ । प्रोग्राम के प्रथम भाग में महाराजी ने उन लोगों को बात करने और अपने हृदय के भावों को व्यक्त करने का मौका दिया जो काफी समय से इंतजार कर रहे थे । वर्षों से छिपी हृदय की भावनाओं को लोगों ने महाराजी के सामने व्यक्त किया ।

दूसरे भाग का प्रोग्राम उन लोगों के लिए सम्पन्न हुआ जो दुबारा ज्ञान की क्रियाओं को समझना चाहते थे । महाराजी चाहते हैं कि लोग इस जीवन का पूरा-पूरा फायदा उठायें । ज्ञान को समझ कर प्राप्त करें । इसीलिए उन्होंने ज्ञान-कुंजी बनायी है जो ज्ञान पाने की तैयारी में सहायक हैं । जिस प्रकार एक किसान जब खेत की भली-भांति तैयारी कर बीज बोता है तो उसकी फसल लहलहा उठती है । उसी प्रकार जब लोग ज्ञान-कुंजी को विधिवत देख व समझकर ज्ञान पाने की तैयारी करते हैं तो उनके जीवन में आनंद ही आनंद है ।

 

सबसे आनंददायक चीज!
महाराजी - बर्लिन, जर्मनी 19 से 20 मई, 2008

20 मई, 2008

महाराजी के यूरोपीय टूर का एक विलक्षण प्रोग्राम 19 व 20 मई 2008 को जर्मनी देश के बर्लिन शहर के कोलम्बिया हाल में सम्पन्न हुआ । बर्लिन ऐतिहासिक दृष्टि से एक बहुत महत्वपूर्ण शहर है । यहां पर महाराजी का प्रोग्राम 18 वर्षों के बाद हुआ । यहां के प्रेमियों ने महाराजी से बर्लिन में प्रोग्राम करने के लिए प्रार्थना की थी और महाराजी ने उनकी प्रार्थना को स्वीकार कर लिया । प्रोग्राम की खबर पाकर यहां के प्रेमियों का विशेषकर वे लोग जो किसी परिस्थिति के कारण अन्य देशों के प्रोग्रामों में नहीं जा पाते थे उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा ।

महाराजी का प्रोग्राम पाकर लोगों के अंदर वर्षों से दबी आशाएं पूरी हो गयीं । अपने प्रवचन में महाराजी ने प्रेमियों को प्रेरणा देते हुए कहा कि, "लोग तो इस जिंदगी में आनंद लेना चाहते हैं किन्तु उन्हें नहीं मालूम कि किस चीज का आनंद लेना है । सबसे अधिक आनंददायक क्या है ? जीवन में स्पष्ट होना आनंददायक है । समझ आनंददायक है । इस स्वांस का आना-जाना आनंददायक है । शांति आनंददायक है । अंदर की सुन्दरता आनंददायक है ।

तुम अपनी प्यास को महसूस करो । ज्ञान एक जरूरी चीज है । ज्ञान वह चीज है जो आपके अंतिम समय तक आपके साथ रहेगा । समझने की कोशिश करो कि तुम किस चीज को खोज रहे हो । क्योंकि सही खोज से एक क्षण में सारी मानसिक पीड़ा, सभी कल्पनाएं और पूरी की पूरी अज्ञानता समाप्त हो जाती है ।

दूसरे दिन का प्रोग्राम दो भागों में सम्पन्न हुआ । प्रोग्राम के प्रात : कालीन भाग में प्रेमियों को दुबारा ज्ञान की क्रियाओं को समझने का मौका मिला जिससे लोगों ने बड़ी ताजगी महसूस की । प्रोग्राम के दूसरे भाग में लोगों को अपने हृदय के भावों को व्यक्त करने का मौका भी मिला । कुछ लोग काफी समय से महाराजी से बात करने का इंतजार कर रहे थे, उनकी हृदय की इच्छा पूरी हुई ।

यह शांति का संदेश अन्य लोगों तक पहुंच सके इस विषय पर चर्चा करते हुए महाराजी ने कहा कि लोगों को एक जुट होकर उमंग से कार्य करने की जरूरत है । इसका बेहतरीन उदाहरण है क्यूबा । हिन्दुस्तान के अलावा क्यूबा देश में भी प्रचार में लोगों में खूब उमंग है । मैं क्यूबा अभी तक नहीं गया हूं । यदि मैं वहां जाता तो बहुत लोग सुनने आते । अभी हाल में वहां पर 4000 लोगों को ज्ञान प्राप्त हुआ । ज्ञान में दिलचस्पी लेने वालों की संख्यां हर दिन बढ़ रहीं है । जिन लोगों को ज्ञान मिला है उनका उत्साह बेजोड़ है । एक जुट होकर प्रचार कार्य में सहयोग करने से अच्छे परिणाम निकलते हैं ।

 

विलक्षण पूजा!
महाराजी - बेलफास्ट, आयर लैण्ड 16 मई, 2008

16 मई, 2008

महाराजी ने अपने यूरोपीय टूर की श्रृंखला में अगला प्रोग्राम आयर लैण्ड देश के बेलफास्ट शहर में किया । यह प्रोग्राम यहां पहली बार हुआ । काफी लम्बे समय से बेलफास्ट शहर के प्रेमी महाराजी को अपने शहर में प्रोग्राम करने का निमंत्रण देते आ रहे थे । उनका प्रयास इस बार सफल हुआ । ज्ञान की दुनिया में, हृदय की दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है । आवश्यकता है हृदय से आने की, सतत प्रयास करने की ।

महाराजी का यह प्रोग्राम बेलफास्ट शहर में 16 मई को ज्ञान प्राप्त लोगों के लिए दो भागों में हुआ । पहले भाग में महाराजी ने प्रेमियों को प्रेरणा देते हुए समझाया कि -
"मैं चाहता हूं कि आप अपने जीवन में संतुष्ट हों । बस ! मैं आपसे यह कहने के लिए नहीं हूं कि जो कुछ आप जानते हैं, वह किसी काम का नहीं है । नहीं, मैं ऐसा कहने के लिए नहीं हूं । मैं यह कहने के लिए नहीं हूं कि आप इस धमर्‌ का पालन करें या आप उस धमर्‌ का पालन करें । आप करें जो आप करना चाहते हैं।

जैसे आप अन्य सभी चीजें करतें हैं, इसे भी करें । संतुष्टि का अनुभव कीजिए । उस आशीवार्‌द को स्वीकार कीजिए जो आपको दिया गया है । कितनी, कितनी प्रचुर मात्रा में यह आपको दिया गया है ।

यह स्वांस! इसे स्वीकार कीजिए । और जिस दिन इसे आप स्वीकार करेंगे वह सबसे विलक्षण पूजा होगी जो आपने पहले कभी नहीं की होगी । आपका हृदय स्वाभाविक रूप से कृतज्ञता से भर जाएगा । और जब आपका हृदय कृतज्ञता से भर जाएगा, मैं आपको बताऊं, इससे बड़ा दूसरा कोई स्वगर्‌ इस संसार में नहीं है । समय रूक जाता है, चिंताएं समाप्त हो जाती हैं । हृदय कृतज्ञता सेभर जाता है ।"

इस प्रकार पहले भाग का ये प्रोग्राम बड़े ही आनंद के साथ सम्पन्न हुआ । महाराजी जब भी अपना संदेश सुनाते हैं अथवा जिन्हें ज्ञान ज्ञान प्राप्त हो गया है उन्हें ज्ञान-उपहार का सदुपयोग करने की प्रेरणा देते हैं तो ऐसा लगता है कि यह संदेश पूरी तरह से नया है ।

प्रोग्राम के दूसरे भाग में महाराजी ने लोगों को उनसे बात करने का मौका दिया । इस मौके को पाकर लोगों के हृदय कृतज्ञता से ही नहीं भरे बल्कि उनके हृदय में लगी वर्षों ‌की प्यास आज तृप्त हो गई । अपने हृदय के भाव व्यक्त करते हुए एक प्रेमी ने कहा कि महाराजी मैं 30 वर्षो‌ं से आपसे हेलो कहना चाह रहा था । मैंने 30 वषर्‌ इंतजार किया और आज मुझे यह मौका मिल गया! आपको बहुत-बहुत धन्यवाद ।

 

जीवन का आनंद!
महाराजी - काल्पे, अलीकान्ते, स्पेन 11 मई, 2008

11 मई, 2008

महाराजी के प्रचार वर्ष 2008 के अभियान में यूरोप में अगला प्रोग्राम 11 मई 2008 को स्पेन देश के काल्पे शहर में सम्पन्न हुआ । इस शहर के प्रेमी कितने ही समय से बेसब्री से इंतजार कर रहे थे कि कब महाराजी का प्रोग्राम उनके शहर में होगा । लोगों ने महाराजी को बहुत से आमंत्रण पत्र भेजे किन्तु इस बार यह संभव हो गया । यह प्रोग्राम इस शहर में पहली बार हुआ ।

स्पेन की लोकल भाषा स्पैनिश है अधिकांश लोग जो अंग्रेजी भाषा नहीं समझते हैं उनके लिए महाराजी के प्रवचन का स्पैनिश भाषा में अनुवाद किया जाता है । भाषा की समस्या के बाबजूद भी स्पेन देश में प्रचार काफी तेजी से बढ़ रहा है । इसका प्रमाण है महाराजी के स्पेन में हुए हाल ही के दो प्रोगाम । काप्ले का यह प्रोग्राम ज्ञान प्राप्त व्यक्तियों के लिये सम्पन्न हुआ । महाराजी ने अंग्रेजी में इस प्रोग्राम को सम्बोधित किया और स्थानीय लोगों के लिये स्पैनिश भाषा मे अनुवाद किया गया ।

महाराजी ने इस जीवन का आनंद लेने के लिए समझाते हुए कहा कि, "संतुष्टि को तौला नहीं जा सकता । आनंद को तौला नहीं जा सकता । प्रेम को तौला नहीं जा सकता । समझ को तौला नहीं जा सकता । इनको तौलने का कोई तराजू नहीं है । इनको तौलने के लिए कोई तराजू बनाना भी नहीं है । इस बात को समझिये । इस हृदय खोलिए । अपनी आंखो को खोलिए । अंदर की तरफ देखिये । ज्ञान इसीलिए है । इसीलिए इसको कहा जाता है कि ज्ञान एक दर्पण है । अंदर देखिये कि यह कितना हरा भरा है, देखिए कितना सुन्दर है । अपने जीवित रहने के कारण को महसूस कीजिए । अपने हर एक दिन को आनंद से भरिए, कृतज्ञता से भरिए, सिर्फ बातों और विचारों से नहीं । यह कोई फार्मूला नहीं है, फिलास्फी नहीं है । यह असलियत है । सचमुच में बिना किसी संकोच के, बिना तर्क के, बिना प्रश्नों के, बल्कि नम्रता से उस आशीर्वाद को स्वीकार कीजिए ।

इसलिए उसे समझने का और हर रोज प्राथमिकता देने का यह कितना सुंदर मौका है । जो आपको दिया गया है उसके प्रति धन्यवाद तब निकलता है जब आप अंदर प्रवेश करते हैं ।

इस प्रकार यह बड़ा सुन्दर प्रोग्राम प्रेमियों के लिए काप्ले शहर में सम्पन्न हुआ । महाराजी की उपस्थिति का प्रेमियों ने भरपूर आनंद लिया । उनके हृदय स्पशीर्‌ वचनों को सुनकर एक-एक प्रेमी का हृदय भर गया । एक प्रेमी अपने आपको रोक नहीं सका और बीच में ही भावविभोर होकर कह उठा,"महाराजी आपको धन्यवाद!"

 

हृदय की ओर देखें!
महाराजी - बिल्बाव, स्पेन 8 मई, 2008

8 मई, 2008

महाराजी के यूरोप में जारी प्रोग्रामों की कड़ी में अगला प्रोग्राम स्पेन देश के बिल्बाव शहर में 8 मई 2008 को हुआ । बिल्बाव एक रमणीक, कला में अद्वितिय व टूरिस्ट शहर है । जलवायु के हिसाब से यहां पर बड़ा सुन्दर वातावरण रहता है । अतः साल भर यहां पर आने-जाने वालों का तांता लगा रहता है । शुरू में यहां पर प्रचार बहुत से थोड़े लोगों में था । धीरे-धीरे प्रचार बढ़ना शुरू हुआ । प्रेमियों की संख्या बढ़ने लगी किन्तु यहां के प्रेमियों ने कभी यह नहीं सोचा था कि महाराजी का प्रोग्राम उनके शहर में होगा । प्रेमियों ने महाराजी को बिल्बाव शहर में प्रोग्राम करने के लिये आमंत्रित किया और महाराजी ने उनके आमंत्रण को स्वीकार कर लिया । हिंदुस्तान की भांति विदेशों में भी महाराजी छोटे-छोटे शहरों में जा रहे हैं । उनके शहर में यह प्रोग्राम पहली बार हुआ ।

यह प्रोग्राम उनके लिए हुआ जिन्हें महाराजी का ज्ञान प्राप्त है । महाराजी चाहते हैं कि हर वो व्यक्ति जो इस जीवन का सच्चा आनंद लेना चाहता है, अपने जीवन में शांति का अनुभव करना चाहता है वह इस ज्ञान को अच्छी प्रकार से समझे और ज्ञान का अभ्यास करे । यह जो जीवन मिला है इसका पूरा-पूरा लाभ उठायें ।

ज्ञान का पूरा-पूरा आनंद लेने के लिए उन्होंने मान्यताओं से दूर रहने पर जोर दिया । ये मान्यताएं ज्ञान-मागर्‌ में किस प्रकार बाधक हैं  इस पर प्रकाश डालते हुए महाराजी ने कहा कि, "ज्ञान तो महत्वपूणर्‌ है ही, साथ ही हृदय की संतुष्टि व शांति के लिए आपको अपने हृदय की ओर देखना चाहिए । अपनी मान्यताओं और अपने विचारों में नहीं फंसना चाहिए कि ज्ञान क्या चीज है ? क्योंकि ज्ञान आपकी मान्यताओं से परे है । ज्ञान को लेने के लिए अपनी मान्यताअों से हटकर आइये । ईमानदारी के साथ आइए । उस चाह और इच्छा के साथ आइये । तब आप ज्ञान को पूरा-पूरा फलने-फूलने का मौका दे पायेंगे । और मैं गारंटी देता हूं कि जिन लोगों ने ज्ञान को पूरा-पूरा फलने-फूलने का मौका दिया उन्होंने ज्ञान को अपने अंतिम स्वांस तक अपनाया है । इस बात का मैं साक्षी हूं।

इसलिए इस हृदय के प्रति वफादार होइये । आपके अंदर जो इस स्वांस का आना-जाना है उसके प्रति वफादार होइये । अपनी वफादारी को वहां पर लगाइये । आप अपनी वफादारी को गलत जगह लगाते हैं तो क्या होता है, आपको निराशा हाथ लगती है इसलिए सावधान रहिये । मैं आपको डरा नहीं रहा हूं किंतु सावधान रहिये । अपनी वफादारी को सही जगह पर लगाइये और आपको उसका फल मिलेगा । तब आप जीवन का भरपूर आनंद ले पाएंगे । यही समय है ।"

इस प्रकार ज्ञान प्राप्त व्यक्तियों के लिए यह बड़ा सुन्दर प्रोग्राम संपन्न हुआ । लोगों की यादें ताजा हो गयीं । मानो भटकते मानव को रास्ता मिल गया हो और सूखती फसल को पानी मिल गया हो । लोगों ने इस अवसर के लिए पूरे हृदय से महाराजी के प्रति अपना आभार प्रकट किया ।

 

शांति का संदेश!
महाराजी - टर्के, इंग्लैण्ड 27 अप्रैल, 2008

27 अप्रैल, 2008

हाल ही में यूरोप के विभिन्न शहरों में आयोजित प्रोग्रामों में महाराजी ने विभिन्न कायर्‌क्रमों को संबोधित किया । इसी श्रृंखला के तहत उन्होंने एक ही हफ्ते में तीसरा प्रोग्राम इंग्लैण्ड के टर्के शहर में किया इस प्रोग्राम में उन्होंने अपनी प्रसन्नत्ता प्रकट करते हुए कहा कि, "आखिर मैं देश के इस भाग में आ ही गया" । इस शहर में उनका यह पहला प्रोग्राम था।

महाराजी को अपने-अपने शहर में बुलाने व प्रोग्राम करने के लिए पूरे इंग्लैण्ड के प्रेमियों में गजब का उत्साह देखने को मिला । छोटा शहर हो या बड़ा, सभी महाराजी के प्रोग्राम के लिए केवल आशा ही लगाये नहीं रहते हैं, बल्कि वे लोग हर छोटी-बड़ी चीजों के लिए संसाधन जुटाने में माहिर हैं जिसकी जरूरत महाराजी के प्रोग्राम के लिए है । और फिर महाराजी के लिए तो न कोइर्‌ शहर छोटा है न बड़ा । उनके प्रोग्रामों के आयोजन के लिए सबसे महत्वपूणर्‌ चीज भी यही है ।

उनका संदेश यद्दपि विश्व के लगभग सभी देशों में पहुंच चुका है और लाखों लोग उनसे ज्ञान प्राप्त करके अपने जीवन का आनंद ले रहे हैं, पर फिर भी अभी कितने ही लोग ऐसे हैं जिन लोगों तक ज्ञान के संदेश की फुहार पहुंचनी शेष है । जीवन सफल करने के लिए यह प्रेरणादायक संदेश और लोगों तक पहुंचे, इसके लिए महाराजी का निरन्तर प्रयास करना, हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है ।

महाराजी ने कहा कि यह सच है कि ये संसार बहुत बड़ा है, पर फिर भी मेरा प्रयास जारी है । जहां तक भी संभव हो सके, मैं अधिक से अधिक लोगों तक अपना संदेश ले जाना चाहता हूं । मनुष्य मनुष्य है । बाहरी विभिन्नताओं के बावजूद भी कुछ भी नहीं बदला है ।

क्या मुझे यह सब कुछ करने की जरूरत है ? नहीं मुझे ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है । यदि मैं रिटायर होना चाहता हूं तो बड़े आराम से रिटायर हो सकता हूं । किन्तु मेरे दिल में एक उमंग है, एक तरंग है, मैं यह संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना चाहता हूं, ताकि वे अपने जीवन में उस परम शांति को जीते जी महसूस कर सकें और शांति में जी सकें । इसलिए मैं अभी ये कर रहा हूं ।

शांति की बात लोगों तक ले जाना, इसका सीधा संबंध तुम्हारे हृदय से है । यह मनुष्य की मूल जरूरत के बारे में है इसका अन्य किसी से चीज से कोई लेना देना नहीं है । यह हम सब के जीवन में शांति लाने के बारे में है । यह इस संभावना के बारे में है कि हम कल्पना से परे उस दिव्य चीज का अनुभव कर सकते हैं जो हमारे हृदय में मौजूद है, क्योंकि हम जीवित हैं । यह वास्तव में अविश्चसनीय है ।

"Words of Peace" टीवी चैनल के बारे में चचार्‌ करते हुए महाराजी ने कहा कि लोग बेइन्तहा इस कायर्‌क्रम की ओर आकषिर्‌त हो रहे हो रहे हैं । वे इसका लाभ उठा रहे हैं । ज्यादातर साउथ अमेरिका में लोग टीवी चैनल पर महाराजी को सुनरहेहैं।

एक दिलचस्प घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक दोस्त अपने दोस्त से कहता है कि आपको मालूम है कि टी वी चैनल में एक इंडियन व्यक्ति का प्रोग्राम बहुत अच्छा आता है । आप इस प्रोग्राम को अवश्य सुनिये । तो उसी का दूसरा दोस्त उससे कहता है कि ठीक है, मैं अवश्य सुनूंगा किन्तु आप पहले मेरे चैनल को देखिये । मेरे टी वी चैनल पर एक चाइनीज व्यक्ति का बहुत अच्छा प्रोग्राम आता है । आप उस प्रोग्राम को भी देखिये । दोनों ने आपस में एक दूसरे के चैनल को देखने के लिए तय किया और एक जगह निश्चित की । जब टी वी चैनल को चालू किया तो उसका दूसरा दोस्त कहता है ये तो वही हैं जो मेरे चैनल में प्रोग्राम देते हैं।

तो इस प्रकार Words of Peace टी वी चैनल प्रोग्राम के माध्यम से लाखों लोग हर रोज महाराजी के संदेश को सुन रहे हैं, और उसे ग्रहण कर रहे हैं

 

एक अन्तरार्‌ष्ट्रिय, ऐतिहासिक व अनोखा प्रोग्राम!
महाराजी - लेस्टर, इंग्लैण्ड 25 अप्रैल, 2008 !

25 अप्रैल, 2008

महाराजी ने ज्ञान प्रचार के प्रति अपना दृष्टिकोण बताते हुए कहा कि अब प्रोग्राम उस प्रकार के होंगे । जिस प्रकार के प्रोग्रामों की उस क्षेत्र में आवश्यकता है । इस संदभर्‌ में विश्व के इतिहास में पहली बार एक प्रोग्राम 25 अप्रैल 2008 को लेस्टर, इंग्लैण्ड में उन प्रेमियों के लिए हुआ जो अति वृध्द होने के कारण उनके प्रोग्रामों में नहीं जा पाते थे।

प्रोग्राम की खबर पाकर लोगों को आश्चयर्‌ तो हुआ ही साथ ही साê